Details
ज़कात इस्लामी निज़ामे-मुआशरत (अर्थ-व्यवस्था) का आधार है. यह अमीरों और ग़रीबों के बीच संतुलन पैदा करने के लिये बनाया गया इलाही क़ानून है.
अगर आप साहिबे-माल हैं और आप पर ज़कात अदा करना फ़र्ज़ है तो फिर आपको यह जानना बेहद ज़रूरी है कि किन-किन मदों में ज़कात दी जाए और किन-किन मदों में ज़कात की रक़म नहीं लगती? आपके माल की ज़कात सहीह हक़दारों तक पहुँच सके और ज़ाया (बर्बाद) न हो, इसका इंतज़ाम करना आपकी ज़िम्मेदारी है.
इस किताब में ज़कात से सम्बंधित लगभग सभी पहलुओं पर तर्कसंगत और तथ्यात्मक जानकारियाँ देने की कोशिश की गई है.
Specifications
| Pages |
48 |
| Size |
110x190cm |
| Weight |
120g |
| Status |
Ready Available |
| Edition |
Ist Edition |
| Printing |
Single Colour |
| Paper |
Maplitho |
| Binding |
Paper Back |