Walidain Hamari Jannat

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रिफाकतों की ढलानें उतर रहे हैं हम,सिमट रही है दिशाएं बिखर रहे हैं हम ।सज़ा मिली है बुज़ुगों से बेनियाज़ी की,कि आज अपने ही बच्चों से डर रहे हैं हम ।।
अंग्रेज़ी तहज़ीब (संस्कृति) के इस दौर को लोग मुहज़्ज़ब (सभ्य) दौर कहते हैं. मॉडर्न ता'लीम (आधुनिक शिक्षा) जिसके पास न हो उसे 'अशिक्षित' कहा जाता है, भले ही इस्लामी नैतिक शिक्षा उसे विराषत में मिली हो. आज के दौर में इन्सान ने दुनियवी तरक्की भले ही बहुत की है लेकिन उसने इन्सानी अखलाक गंवा दिये हैं.
इस तथाकथित सभ्य दुनिया में बूढ़े माँ-बाप के लिये घर में जगह नहीं हैं. उनके लिये 'आल्ड एज होम (वृद्धाश्रम)' खोले गये हैं. 'मदर्स डे' और 'फादर्स डे' मनाने वाले दुनियवी रंगीनियों में इतना खो चुके हैं कि उनके पास अपने माँ-बाप को दफनाने की भी फुर्सत नहीं है. उनके देश में 'फ्नुरल कम्पनियाँ' हैं जो पैसा लेकर कफन-दफन का सारा इंतज़ाम कर देती हैं. ये लोग अपनी करतूतों का अंजाम जानते हैं, इसलिये इनके देशों में शादी करके रहने का रिवाज खत्म हो रहा है क्योंकि इन्हें मा'लूम है कि उनकी औलाद भी ऐसी ही निकलेगी.
माँ-बाप के कदमों तले जन्नत की खुशखबरी वही इस्लाम देता है जिसे अंग्रेज़ी दुनिया न जाने क्या-क्या कहती है? यह किताब कुर्आन व हदीष की रोशनी में वालिदैन की अहमियत बयान करती है.

Specifications

Color 32
Size 14x22cm
Weight ---
Status Out of Stock
Edition Ist Edition
Printing Double Colour
Paper Maplitho
Binding Paper Back