इस किताब में अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के जीवन की कुछ झलकियाँ हैं. आपकी पूरी ज़िन्दगी इतनी आदर्शपूर्ण है कि लिखने वालों क़लम थक जाए. ऐसे महानतम इन्सान से दो ही किस्म के लोग दुश्मनी रख सकते हैं, 

(1). एक वो जिन्हें आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पवित्र जीवनी के बारे में जानकारी न हो.
(2). दूसरे वो लोग जो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से हसद (ईर्ष्या, द्वेष) रखते हैं और आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के व्यक्तित्व के प्रति नफरत में अंधे होकर नुक्ता-चीनी करना चाहते हैं.

जो इन्सान इंसाफ-पसन्द (न्यायप्रिय) हो, वो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सीरत (पवित्र जीवनी) पढऩे के बाद यही कहेगा कि वो तो खैरुल-बशर (सर्वश्रेष्ठ इंसान) हैं; महामानव हैं, जगतगुरू हैं; इन्सानियत के मसीहा हैं. ऐसे महापुरूष को बुरा कहने वाले लोगों के बारे में आप ही फैसला कीजिये कि उसे क्या कहा जाए?

किसी भी इन्सान के बारे में कुछ भी कहने से पहले हमें यह देखना होता है कि उसके जीवन के बारे में क्या तथ्य मौजूद हैं? इस्लाम के अलावा कई ऐसे धर्म हैं जिनकी किताबों में अपने ही महापुरूषों के बारे में चरित्रहनन की हद तक बुरा-भला लिखा हुआ मौजूद है. इसलिये जो लोग उनके बारे में उल्टा-सीधा लिखते हैं, उनके पास एक आधार होता है. लेकिन हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के बारे में इस्लामी साहित्य में कुछ भी गलत लिखा हुआ मौजूद नहीं है. अपने मन से किसी पर कीचड़ उछालने वाली बातें लिखना या चरित्र-हनन करने वाली फिल्में बनाना मानसिक दीवालियेपन का षुबूत है. 

कुरान कहता है कि बुराई का जवाब भलाई से दो. इस किताब में अल्लाह के आखरी नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के अखलाक का बयान करते हुए आपकी 40 खूबियों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गयी है. यह किताब हर धर्म के मानने वालों के लिए पठनीय है.