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Aurat Aur Shopping

Women Series

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Aurat Aur Shopping

SKU: AUASH In Stock
AUTHOR(S):
Umme Abde Munib, Muhammad Akhtar Siddique
TRANSLATOR(S):
Saleem Khilji
₹ 30 ₹ 40 25% OFF
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बाज़ार जाना इन्सान की ज़रूरत भी है और मजबूरी भी. लेकिन आज के उपभोक्तावादी दौर में बहुत से लोगों के लिये यह दिल बहलाव की एक चीज़ बन गई है. टीवी में प्रदर्शित और अखबारों में छपने वाले विज्ञापनों ने जहाँ इसे बढ़ावा दिया है वहीं मॉल कल्‌चर के आने के बाद बाद तो 'शॉपिंग' की आदत एक नशे की तरह बन गई है.

हमारे समाज में आम तौर पर औरतें ही बाज़ार जाती है क्योंकि मर्द अपने कारोबार या मज़दूरी पर चले जाते हैं. औरतों और मर्दों में कुछ बुनियादी फर्क हैं. इन्हें न मानना हकीकत से इन्कार करने के बराबर है. अल्लाह के रसूल (स.) ने सबसे बेहतरीन जगह मस्जिद और सबसे बदतरीन जगह बाज़ार को बताया है. इसलिये बाज़ार जाने के दौरान औरतों को विशेष ध्यान रखने की ज़रूरत है. बहुत से आवारा किस्म के नौजवान सज-संवरकर बाज़ारों में तफरीह करने आते हैं. आम तौर पर उनका मकसद खरीदारी करने आई औरतों के साथ छेड़छाड़ करना होता है. अगर औरत बाज़ार जाए तो उसे किन बातों का ध्यान रखना चाहिये, यह किताब इस मामले में इस्लामी नुक्‌त-ए-नज़र (दृष्टिकोण) से औरतों की रहनुमाई करती है

Status In Stock
SKU AUASH
Pages 60
Size 10.5x18.5 cm
Weight 50gm
Edition 3rd Edition
Printing Single Colour
Binding Paper Back
Paper Maplitho