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Aur Mein Mar Gaya

Social Reform

Social Reform

Aur Mein Mar Gaya

SKU: AM/R09 In Stock
AUTHOR(S):
Sumayya Muhammad Sadik
TRANSLATOR(S):
Saleem Khilji
₹ 15 ₹ 20 25% OFF
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यह एक अटल सच्चाई है कि जो भी जानदार इस दुनिया में पैदा हुआ उसे एक दिन मरना है. अल्लाह तआला के सिवा कोई चीज़ लाफानी (अजर-अमर) नहीं है. मगर अफसोसनाक बात यह है कि दुनियावी रंगीनियों में खोकर लोग आखिरत की ज़िन्दगी को भुला बैठे हैं.

ये किताब बिस्तरे-मर्ग (मृत्यु शैया) पर पड़े एक इन्सान के मौत के बारे में तसव्वुर (कल्पना) पर आधारित है. जब इन्सान अस्पताल के बेड पर होता है तब वो मौत को करीब से महसूस करता है; खासकर उस वक्त जब डॉक्टर उसके अकरबा (परिजनों) को दुआ करने के लिये कह रहे होते हैं. ये वो लम्हा होता है जब डॉक्टर भी अल्लाह की कुदरत के आगे सरेण्डर (आत्म-समर्पण) कर देते हैं.

यह छोटी सी किताब नसीहत है, हर उस शख्स के लिये जो आखिरत पर यकीन रखता है ।

Status In Stock
SKU AM/R09
Pages 24
Size 10.5x18.5 cm
Weight 25gm
Edition 2nd Edition
Printing Single Colour
Binding Paper Back
Paper Maplitho