पहले शैतान का नाम "इबलीस" है, वो एक जिन्न है, लेकिन जिन इन्सानों के काम व करतूतें शैतान जैसी हों, वो भी शैतान हैं. शैतान का काम है, लोगों को अल्लाह की नाफर्मानी वाले काम करने पर आमादा करना, खुद भी अल्लाह के अहकाम की खिलाफवर्ज़ करना और दूसरों को भी आमादा करना.

अल्लाह की हराम की हुई चीज़ों की ओर उसके बन्दों को उभारना.शैतान बहुत ही सोच-समझकर धोखा और फरेब देने की प्लानिंग करता है. शैतान लोगों का एक ऐसा दुश्मन है, जो हर वक्त उनके साथ लगा रहता है.

अगर हमें शैतान के जाल में फंसने से बचना है तो उसके साथियों से भी बचना होगा. कौन है शैतान के साथी? हम उन्हें कैसे पहचान सकते हैं? इस किताब में पूरी तफ्सील के साथ इसके बारे में जानकारी दी गई है.