अगर गौर से देखें तो हमारे चारों तरफ़ अल्लाह की कुदरत की बहुत सारी निशानियाँ फैली हुई है. अल्लाह के कलाम क़ुरान को सच्चे दिल से पढ़े तो मन गवाही दे उठता है कि यह किसी इंसान का कलाम नहीं है. आखरी नबी हजरत मुहम्मद (सल्लल लाहु अलैहि व सल्लम) की हयाते-तय्यबा (पवित्र जीवनी) पर नज़र डाले तो यह महसूस होगा कि वे वाकई अल्लाह के रसूल थे आम इन्सान नहीं थे. लेकिन दुनिया में बहुत से लोग ऐसे हैं जो यह सब बातें नहीं मानते. उन के मन में बहुत सारे ऐतराज हैं. हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उनको अच्छे तरीके से जवाब दें. इस किताब में एक ग़ैर मुस्लिम वकील द्वारा उठाए गए 14 एतराजो का ठोस दलीलों के साथ तर्क संगत अंदाज़ में जवाब दिया गया हैं. यह किताब इस्लाम के बारे में फैली बहुत सी गलतफहमियों का निवारण करती है.