कुर्आन अल्लाह की किताब है जिसे अल्लाह तआला ने तमाम इन्सानों की हिदायत के लिये नाज़िल किया है और इसे समझना-समझाना भी आसान किया है. कुर्आन करीम का मा'नी (अर्थ) व मफहूम (भावार्थ) समझने के लिये इसकी तफ्सीर बहुत मददगार षाबित होती है.

कुर्आन करीम की अनेक तफ्सीरें लिखी गई हैं, जिनमें से एक अहम नाम है, "तफ्सीरुल कुर्आनुल अज़ीम' जो कि "तफ्सीर इब्ने कषीर' के नाम से जानी जाती है. हाफिज़ इब्ने कषीर (रहि.) ने इसे आज से करीब 700 साल पहले तर्तब दिया था. आपने तफ्सीर करते हुए सबसे पहले जिस आयत की तफ्सीर की जा रही है, उसी मज़मून की दूसरी आयतें पेश की, उसके बाद उस आयत से मुता'ल्लिक जो-जो हदीषें उन्हें मा'लूम हुईं उनको दर्ज किया. इससे हर आयत का मुकम्मल मा'नी व मफहूम समझ में आ जाता है. इसका अन्दाज़े-बयाँ इतना आसान है कि आम आदमी का दिल कुर्आनी आयतों के असल खुलासे से मुतमईन (संतुष्ट) हो जाता है. "तफ्सीर इब्ने कषीर' की अहमियत को हर दौर के मुहद्दिषीन व मुफस्सिरीन ने कुबूल किया है.

इसके कई नुस्खे दस्तयाब (उपलब्ध) हैं. हमने जिस उर्दू नुस्खे को हिन्दी में अनुवादित किया है उसमें दस नामवर मुफस्सिरीन की तहकीक व तखरीज भी शामिल है जिन्होंने बयान की गई हर हदीष की सिहत की पूरी वज़ाहत की है. उलम-ए-किराम की राय के बाद हिन्दी नुस्खे में से हमने उन रिवायतों को हटा दिया है जिनके बारे में "बातिल (असत्य)', "मौज़ूअ (गढ़ी हुई)', "ला असल लहू (बेबुनियाद)' का हुक्म लगाया गया है. यही नहीं ज़ईफ रिवायतों को अलग से बॉक्स में दर्शाया है. इस तरह यह हिन्दी नुस्खा पढ़ने वालों के लिये बहुत ही मुफीद बन पड़ा है.