क़ुराने करीम के इस नुस्ख़े की इम्तियाज़ी ख़ासियत यह है कि इसमें अरबी अल्फ़ाज़ के नीचे बॉक्स में उनका हिन्दी में उच्चारण छापा गया है. इस नुस्ख़े के ज़रिये वे तमाम लोग क़ुरान करीम की तिलावत, सहीह तर्ज पर कर सकेंगे जो अरबी पढ़ना नहीं जानते या जिनकी अरबी तलफ्फुज़ कमज़ोर है. तिलावत के दोरान रुमूज़े ओकाफ़ का एहतियात बरता जाना बेहद ज़रूरी होता है. जहाँ वक्फे लाज़िम का निशान हो अगर वहाँ न ठहरा जाए तो मा'नी बदल जाने का अंदेशा होता है. उन मक़ामात को रंगीन बॉक्स में सफ़ेद हर्फों में छापा गया है. वक्फे-मुतलक वाले मक़ामात सफ़ेद बॉक्स में रंगीन हर्फों में छापे गये है. हर पेज के नीचे रुमूज़े-ओक़ाफ़ के बारे में जानकारी दी गई है. कम्पोज़िंग करने के बाद हत्तल इम्कान पूरे एहतियात के साथ, -जितनी तोफीक़ अल्लाह ने हमें अता फरमाई, उस हद तक कोशिश करते हुए-इसकी तस्हीह की गई है. कई बार प्रूफ चैक करने के बाद तिलावत कि आवाज़ के साथ इसके मतन को पढ़कर मिलान भी किया गया है फिर भी बे-ऐब अल्लाह की ज़ात ही है. अल्लाह तआला से दुआ है कि वो इस नुस्ख़े को तमाम मुसलमानों के लिये मुफ़ीद बनाए और इसे शर्फे-कुबूलियत बख्शे. अल्लाह तआला उन तमाम लोगों-जिन्होंने इसकी इशाअत में तआवुन किया है- को रोज़े-महशर उस अजरे अजीम से नवाज़े जिस का उसने वा'दा किया है.