इस्लाम एक मुकम्मल निज़ामे-हयात (पूर्ण जीवन व्यवस्था) है. यह सिर्फ बन्दगी के उसूलों (पूजा-उपासना के नियमों) तक ही सीमित नहीं है बल्कि अपने मानने वालों को जिन्दगी के हर मोड़ पर रहनुमाई (मार्गदर्शन) करता है.

इस किताब में खाने-पीने, सोने-जागने, वैवाहिक रहन-सहन, इजाज़त लेने, सलाम करने, मजलिस व बैठक (सभा व मीटिंग), बातचीत, बीमारपुर्सी, ता'ज़ियत (सांत्वना देने), हंसी-मज़ाक, सफर (यात्रा) करने, रास्ते पर चलने-फिरने और खरीदने-बेचने से सम्बंधित मुद्दों पर इस्लाम के उसूलों की जानकारी दी गई है.