मुनाफिक का मतलब होता है, 'दीन के मामले में दोहरी नीति (डबल स्टेण्डर्ड) रखने वाले लोग'. कुर्आन करीम में मुनाफिकों की सख्त अल्फाज़ में मज़म्मत (निन्दा) की गई है. ये मुसलमानों के पास ईमान व इस्लाम की दुहाई देते हैं और काफिरों व मुश्रिकों के पास उनके साथी होने का दम भरते हैं. कुर्आन करीम में इर्शादे बारी तआला है,

'और जब उनसे कहा जाता है कि ज़मीन पर फसाद (अव्यवस्था) पैदा मत करो तो वे कहते हैं कि हम तो इस्लाह (सुधार) करने वाले हैं. खबरदार! हकीकत में यही लोग बिगाड़ पैदा करने वाले हैं लेकिन समझ नहीं रखते. और जब उनसे कहा जाता है कि दूसरे लोगों की तरह तुम भी ईमान लाओ, तो वे कहते हैं कि जिस तरह बेवकूफ लोग ईमान लाए हैं क्या हम भी उस तरह ईमान लाएं? सुन लो! यही लोग बेवकूफ हैं, लेकिन वे नहीं जानते.'                       (सूरह बकरः : 11-13)

'और जब वे मोमिनों से मिलते हैं तो कहते है कि हम भी ईमानवाले हैं और जब अकेले में अपने शैतान सिफत लोगों के पास जाते हैं तो कहते हैं कि हम तो तुम्हारे साथ हैं, हम उन (मुस्लिमों) से सिर्फ मज़ाक करते हैं. अल्लाह तआला भी उनसे मज़ाक करता है और उनको सरकशी और बहकावे में और ज़्‌यादा बढ़ा देता है.'                        (सूरह बकरः : 14-15)

शैखुल इस्लाम इमाम इब्‌ने कय्यिम (रहि.) की यह किताब कुर्आन व सहीह हदीषों की रोशनी में मुनाफिकों की पहचान को आम करती है ताकि सीधे-सादे मुसलमान उनकी बुराइयों से बच सकें.