इस्लाम के बारे में लोगों के मन में बहुत सारी गलतफहमियां हैं. ये गलतफहमियां उन लोगों ने पैदा की हैं, जिन्हें इस्लाम के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है. जब कोई बात सन्दर्भ से काटकर कही जाती है तो अक्सर अर्थ का अनर्थ हो जाता है. लिहाजा हर मोमिन-मुस्लिम की यह जिम्मेदारी है कि वे दुनियावालों के सामने इस्लाम कि गवाही पेश करें. इस्लाम कि गवाही देने का मतलब यह है कि :-

हर इन्सान के जमीर (अन्तरात्मा) को झकझोरा जाये. उन्हें यह बताया जाए कि तमाम इन्सानों का खालिक (स्रष्टा) सिर्फ एक अल्लाह है.

इन्सानों कि खलकत (रचना) का एकमात्र मकसद यही है कि इन्सान सिर्फ अपने खालिक कि बन्दगी (पूजा-उपासना) करे.

जमीन व आसमान में मौजूद निशानियों कि तरफ तवज्जो (ध्यान) दिलाया जाए ताकि वे भी अपने वास्तविक पालनहार को पहचान सकें.

दीने-इस्लाम का पैगाम उनके सामने अहसन (भले) तरीके से पेश किया जाए ताकि वे सोचने पर मजबूर हों.

प्रस्तुत किताब डॉ. ज़ाकिर नाइक द्वारा लिखित Answers to Non-Muslim's common Questions about Islam का हिंदी रूपान्तरण है. कुछ सवाल ऐसे हैं. जिनके जवाब विस्तारपूर्वक दिये जाने ज़रूरी थे, इसी ज़रूरत के मद्देनज़र अनुवादक ने उन सवालों के डॉ. ज़ाकिर नाइक द्वारा दिये गए जवाब के बाद तशरीह (व्याख्या) की बढ़ोतरी की है. मूल किताब के मैटर के अनुवाद और व्याख्या के मैटर को अलग-अलग दर्शाने के लिए अलग फोंट्स का इस्तेमाल किया गया है.